GST on electricity

बिल्डरों द्वारा बिजली बिलों में जीएसटी: क्या है कानूनी स्थिति?

विवाद का मुद्दा:

पिछले कुछ समय से, बिल्डरों द्वारा बिजली बिलों में जीएसटी लगाने को लेकर विवाद बढ़ रहा है। कुछ का तर्क है कि यह गैरकानूनी है, जबकि अन्य का कहना है कि यह कानूनी रूप से स्वीकार्य है।

कानूनी स्थिति:

  • बिजली बिलों पर जीएसटी: विद्युत आपूर्ति को “अनिवार्य सेवा” माना जाता है और जीएसटी अधिनियम के तहत इसे 5% की दर से छूट प्राप्त है। इसका मतलब है कि बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) द्वारा उपभोक्ताओं को सीधे दी जाने वाली बिजली पर जीएसटी नहीं लगता है।
  • फ़िक्स्ड चार्जेस मे छूट: वित्त मंत्रालय के सर्क्युलर नंबर 178/10/2022-GST के पेरा नंबर 10.2 के अनुसार बिजली के दोनों तत्व स्थायो शूल्क व अस्थायी शुल्क (यूनिट) दोनों ही जीएसटी से बाहर हैं। इसलिए इसपर सेवा शुल्क नहीं लगाया जा सकता हैं।  (ऑर्डर कॉपी)
जीएसटी डिटेल्स
  • जीएसटी का प्रावधान:  वही दूसरी ओर वित्त मंत्रालय के सर्क्युलर नंबर 206/18/2023-जीएसटी के पेरा नंबर 3.2 के अनुसार यदि बिल्डर बिजली के बिलो मे अन्य मदो का समावेश करता हैं तो उसपर जीएसटी को लगाया जा सकता हैं व ऐसी स्थिति को “कम्पोजिट” कहा गया हैं व इसके पूरे बिल पर जीएसटी लगाया जा सकता हैं जो की 18% होगा। (ऑर्डर कॉपी)

(रियल एस्टेट डेवलपर्स और आरडब्ल्यूए अगर फ्लैट मालिकों से डिस्कॉम द्वारा निर्धारित बिजली टैरिफ से अधिक शुल्क लेते हैं तो उन्हें बिजली बिल पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना होगा।)

  • बिल्डरों द्वारा बिजली बिलों में जीएसटी: मामला जटिल हो जाता है जब बिल्डर या रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) मध्यस्थता करते हैं। यदि बिल्डर या RWA बिजली खरीदते हैं और फिर इसे उपभोक्ताओं को बेचते हैं, तो वे बिजली पर “सप्लाई सेवा” के रूप में 18% जीएसटी लगा सकते हैं।
  • मरम्मत शुल्क पर जीएसटी: मरम्मत और रखरखाव शुल्क (CAM Charges) को “सुप्लाइ ऑफ़ सर्विस” माना जाता है और इस पर 18% जीएसटी 7500 रुपए प्रतिमाह के ऊपर के बिल पर लगता है। ऐसा प्रतीत होता हैं की यह अभी आरडबल्यूए के लिए ही लागू होता हैं व बिल्डर के विषय मे इसपर कोई भी स्पष्टता नहीं हैं व इसके लिए हमने श्री पंकज कुमार अतिरिक्त सचिव, जीएसटी को एक पत्र भेजा हैं। (ऑर्डर कॉपी)

विवादित पहलू:

  • अवैध जीएसटी वसूली: कुछ का तर्क है कि बिल्डर अक्सर गलत तरीके से बिजली बिलों में जीएसटी लगाते हैं, भले ही वे इसे DISCOMs से सीधे खरीदते हों।
  • अत्यधिक मरम्मत शुल्क: कुछ मामलों में, बिल्डर मरम्मत और रखरखाव के लिए अत्यधिक शुल्क लेते हैं, जिससे जीएसटी का बोझ बढ़ जाता है।
  • कम्पोजिट शुल्क: यदि बिल्डर बिजली और मरम्मत शुल्क (CAM Charges) को एक साथ वसूलते हैं, तो इसे जीएसटी की भाषा में “कम्पोजिट” कहा जाता है। इस स्थिति में, छूट का नियम लागू नहीं होता है और पूरे शुल्क पर 18% जीएसटी लगता है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या:

  • जागरूकता: उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिलों और उनमें शामिल जीएसटी घटकों के बारे में जागरूक होना चाहिए।
  • कानूनी सहायता: यदि आपको लगता है कि आपसे गलत तरीके से जीएसटी वसूला जा रहा है, तो आप कानूनी सहायता ले सकते हैं।
  • आरडब्ल्यूए से सवाल: यदि आप RWA द्वारा प्रबंधित सोसायटी में रहते हैं, तो आप आरडब्ल्यूए से बिजली बिलों और जीएसटी के बारे में सवाल पूछ सकते हैं।
  • पृथक शुल्क: बिल्डिंगों  मे बिजली व मरम्मत शुल्क अलग अगल लिया जाता हैं तो वो लोग जीएसटी काउंसिल मे इसके लिए शिकायत कर सकते हैं। यदि किसी सोसाइटी मे बिजली व मरम्मत शुल्क अलग अगल लिया जाता हैं व इस स्थिति मे लोग जीएसटी काउंसिल को पृथक आवेदन कर सकते है।  

निष्कर्ष:

बिल्डरों द्वारा बिजली बिलों में जीएसटी एक जटिल मुद्दा है। उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो कानूनी सहायता लेनी चाहिए। सरकार को भी इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए और उपभोक्ताओं को गलत जीएसटी वसूली से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

ध्यान दें: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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