उत्तराखंड में स्वास्थ व्यवस्था ख़त्म, दुराचार में प्रथम
उत्तराखंड में स्वास्थ व्यवस्था ख़त्म, दुराचार में प्रथम

उत्तराखंड में स्वास्थ व्यव्यस्था दिनों दिन गिरती जा रही हैं और ढाई साल पूरा होने के बाद लगता नहीं हैं की त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार समस्या को लेकर गंभीर भी है| कल ही बागेश्वर की गरुड़ तहसील में एक गर्भवती महिला ने गर्भस्थ शिशु समेत मौत हो गयी| क्योकि CHC बैजनाथ ले गयी व CHC बैजनाथ वालो ने उस गर्भवती महिला को बागेश्वर जिला अस्पताल में भेज दिया और मजे की बात तो देखिये की जिला अस्पताल ने भी इस महिला को उच्च अस्पताल के लिए रेफेर कर दिया और महिला की अपने शिशु के साथ रास्ते में ही मौत हो गयी|

अब प्रश्न यह उठता हैं की इस मौत का जिम्मवार कौन हैं क्या वो डॉक्टर या वो व्यवस्था इसने पूरी व्यवस्था व तंत्र को पूरी तरह ढेर कर दिया हैं| आज स्वास्थ के मामले में उत्तराखंड की स्थिति बहुत ही चिंताजनक है लेकिन त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार है जिसके कान में जू तक नहीं रेंगती हैं| हालात तो यह हैं की मुख्यमंत्री को डेंगू जैसी बिमारी भी बिमारी नहीं लगती हैं उनके हिसाब से तो गाय प्राणवायु देती है तो पेड़ो की क्या जरूरत| मुख्यमंत्री के इस लाटेपने के कारण कई बार तो ऐसा बोल देते हैं की उत्तराखंड की दुर्दशा पर हँसे या रोये का मन करता है|

जब उत्तराखंड में डेंगू एक महामारी का रूप ले चुका था तो मुख्यमंत्री को जागरूकता व प्रशासनिक, स्वास्थ की समीक्षा करनी चाहिए थी वो लोगो को सुझाव दे रहे थे की डेंगू कुछ नहीं होता एक पेरासिटामोल 650 खाओ और आराम करो| लाटे का यह बयान मूर्ख्तापूण ही था क्योकि जब उन्हें मालूम ही नहीं की डेंगू को लोगो की प्लेटलेट्स गिरते हैं और उसका एक ही उपाय हैं की उस व्यक्ति को और प्लेटलेट्स चढ़ाए जाए जिससे की उसकी जान बच सके|

आज प्रशासन की बेरुखी व राजनीति के कारण अधिकतर डॉक्टर छोड़कर जा चुके है या छोड़ने को तैयार है खुद निति आयोग ने कहा था की उत्तराखंड की हालत स्वास्थ के मामले में दयनीय है लेकिन सरकार के सचिव श्री युगल पन्त ने निति आयोग के आकड़ो को खारिज करते हुए कहा की यह आकडे हरीश रावत सरकार दे समय के है| श्री पन्त यह भूल गए की अगर आपके राज्य के आकडे 2006 के थे तो अन्य राज्यों की आकडे भी समकक्ष ही होंगे और आज के हालात तो पहले से भी बदतर हैं इसलिए अगर पिछले वित्त वर्ष के आकडे होते तो उत्तराखंड किस स्थिति शायद और भी दयनीय होती|

उत्तराखंड का कोई भी अस्पताल हो सब अस्पतालों में डॉक्टर, उपकरण, दवाईया व संसाधनों का अभाव है| उत्तराखंड के सारे के सारे CHC रेफरेल सेंटर बनकर रह गए हैं और कुछ दिन पूर्व ही एक विधयाक की देवरानी के बच्चे की मौत रास्ते में हायर सेंटर में ले जाते जाते हो गयी| उत्तराखंड की लाटी सरकार की गंभीरता वही ख़त्म हो गयी थी जब उसने GVK जैसी प्रतिष्ठित कंपनी को छोड़कर मध्य प्रदेश की कैंप जैसी कंपनी को उत्तराखंड की जीवनरेखा 108 का ठेका दे दिया और आज 108 की व्यवस्था हाशिये पर हैं|

सरकार को 108 पर निगरानी के लिए उसमे GPS इनस्टॉल करना चाहिए था जिससे की उसकी गुणवता व उपलब्धता सुनिश्चित हो सके लेकिन किन्ही अज्ञात कारणों से सरकार ने ऐसा नहीं किया और अज्ञात कारण तो आप जान ही गए होंगे|

कैंप कंपनी ने आते के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री खंडूरी की प्रचलित सेवा खुशियों को सवारी को चलाने से मना कर दिया और उसके सभी वाहन सरकार को सौप दिए| इससे उत्तराखंड में दूरस्थ गाँव के रहने वाले लोगो को अत्यंत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं| आज कुमाऊ के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी की हालत सबसे खराब हैं एक यही अस्पताल है जहा पूरे कुमाऊ के लोगो हायर सेंटर कहकर रेफेर किया जाता हैं |

सुशीला तिवारी में दवाइयों का टोटा है व अंदरूनी राजनीति के कारण काम करने वाले डॉक्टर काम छोड़ जा रहे हैं व पिछले शुक्रवार को ही गुटबाजी के कारण ही कैंसर व रेडियोलोजी विभाग के दो सहायक प्रवक्ताओ ने इस्तीफा दे दिया हैं और अपने इस्तीफे में उन्होंने यह आरोप लगाए हैं की सीनियर डॉक्टर अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपने अपने निजी अस्पतालों में भेज रहे हैं व सुविधाओं के होने के बावजूद उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा हैं|

उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र सिंह रावत केवल प्रोपगेंडा मंत्री बनकर रह गए हैं उनका काम सिर्फ और सिर्फ राज्य की उपलब्धियों चाहे और अब की हो या पूर्व की चित्र के साथ छापकर वाहवाही लेने की हैं| कुछ दिनों पहले ही इनोवेशन सूचनाक 2019 में तीसरा स्थान मिला था जबकि सिक्किम जैसा प्रदेश उत्तरपूर्व व पहाड़ी प्रदेशो में शीर्ष पर था| सिक्किम एक छोटा लेकिन विकास की सोच रखने वाला राज्य हैं जबकि उत्तराखंड में लूट लो वाली सोच वाले लोग शीर्ष पर हैं और यही कारण हैं उत्तराखंड के बाबू लोग अपनी सालाना आय को छिपाते हैं| जबकि नियम हैं की हर साल आपको अपनी आय को प्रदर्शित करना होता हैं|

यह हमारे लिए शर्म का विषय हैं की आज निकम्मे नौकरशाहों, भ्रष्ट राजनीति व मूकदर्शक बुद्धिजिवीओ के कारण उत्तराखंड किसी अन्य कारणों से भी प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका हैं| NCRB की ताजा रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड पहाड़ी राज्यों में सबसे ज्यादा दुराचार होने वाले राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड प्रथम स्थान पर हैं| क्या अब मुख्यमंत्री इस उपलब्धि पर चित्र सहित फेसबुक व एनी स्त्रोतों के द्वारा प्रचारित करेंगे?

हमारे प्रतिनिधि जीवन पन्त ने उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ विभाग मे इस विषय पर RTI लगाईं थी लेकिन आज विभाग कहता हैं की उन्हें तो RTI मिली ही नहीं| क्योकि उसका पोस्टल आर्डर जो जा वो भुगतान भी हो चुका था| आज हम फिर उन्ही सवालों के साथ राज्य सरकार में स्वास्थ व्यवस्था की पड़ताल के फिर एक RTI लगाने जा रहे हैं क्योकि हमारा यह मानना हैं की सरकारे निरंकुश, बहरी व भुलक्कड़ होती हैं| इसलिए हमें इन्हें हिलाते रहना चाहिए|

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