लाडलियो को ठगती, लाटी सरकार
लाडलियो को ठगती, लाटी सरकार

उत्तराखंड की रावत सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अभी तक बाजार से 1000 करोड़ का ऋण ले चुकी हैं जो की उनके अनुसार राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन व भत्तो के लिए लिया गया हैं लेकिन सरकार के पास कोई जवाब नहीं हैं की जब राज्य की अर्थव्यवस्था ऋण पर चल रही हैं तो मंत्रियो विधायको के लिए पांच सितारा होटल में ठहरने, लक्ज़री गाडियों व दर्जा प्राप्त माननीयो के लिए पैसा कान्हा से आएगा|

इतना ही नहीं राज्य सरकार जल्द ही एक अध्यादेश लाने वाली हैं जिसके कारण पूर्व मुख्यमंत्रियों पर राज्य सरकार का बकाया माफ़ हो सके| क्योकि त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भी तो एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री बनना हैं| राज्य सरकार की यह फिजूलखर्ची राज्य के आर्थिक संकट को बढ़ा रही हैं|

रावत सरकार एक तरफ तो अपने पद को बचाने के लिए नित नए नए प्रलोभन मंत्रियो, अधिकारियो व अन्य लोगो को दे रहे हैं वही दूसरी और प्रदेश को लाडलियो के हक़ पर पैसा ना होने का रोना रोकर डाका डाल रही हैं|

उत्तराखंड में कन्या गोरा धन के नाम से एक योजना राज्य सरकार चलाती हैं जिसमे 12वी उत्तीर्ण करने के पश्चात कन्याओ को 51000 की एक प्रोत्साहन राशि दी जाती हैं| इस कार्य के लिए राज्य सरकार ने समाज कल्याण विभाग को अधिकृत किया था मगर 2017 में इस कार्य को हस्तांतरित कर के बाल विकास विभाग को दे दिया गया इसमें गौरा कन्या धन योजना के साथ-साथ नंदा कन्या धन योजना को भी शामिल कर नंदा गौरा कन्या धन योजना नाम दिया गया जिसके तहत जन्म से लेकर विवाह तक विभिन्न चरणों में कुल मिलाकर 51000 दिए जाने थे मगर इसमें फरवरी 2019 में सचिव राधा रतुरी ने फिर संशोधन कर दिया और इसके तहत विभिन्न चरणों की बजाए 51000 एकमुश्त इंटर उत्तीर्ण होने पर दिए जाने का प्रावधान रखा गया था और कन्या के जन्म पर 11000 एकमुश्त माता के खाते में ऑनलाइन जाने थे|

अब वर्ष 2017 में पास कन्याओ को राज्य सरकार कन्या गोरा धन की राशि देने में आनाकानी कर रही हैं व जब लोगो ने विरोध शुरू किया तो राज्य सरकार ने 5000/- की राशि प्रति कन्या देने को आदेश पारित कर दिया हैं जबकि उसे नियमो के तहत 51000/- रूपये दिए जाने थे| जब उच्चाधिकारियों से इस विषय में बात की गयी तो उन्होंने बताया की उन्हें उप्पर से यही आदेश है क्योकि सरकार के पास पैसा नहीं हैं|

राज्य में त्रिवेन्द्र सिंह रावत भूल चुके हैं की सरकारे जन कल्याण के कार्यो के लिए बनाई जाती हैं लेकिन यंहा तो स्वय कल्याण की योजनाओ पर करोडो रुपया उधार लिया जा रहा हैं व इसपर ऋषि चार्वाक द्वारा जो सूक्ति “जब तक जियो सुख से जियो कर्ज लेकर घी पियो”  याद आती हैं और किस माई के लाल में दम हैं जो पिया घी निकाल सके|